मंगलवार, फ़रवरी 15, 2005

वेलेंटाइन्स डे

आज मैं वेलंटाईन्‍स डे के बारे में लिखूँगी। कल दस बजे एक आदमी मेरा दरवाज़ा खटखटा रहा था। तो मैं दरवाजा खोलने गयी। जब मैंने दरवाजा खोला तब मैंने एक बड़ा गुलदस्‍ता डाकिये (पोस्‍टमैन) के हाथों में देखा। बारह लाल गुलाब उस गुलदस्‍ते में थे। बहुत ही ख़ूबसूरत गुलाब थे। मैं ने उन सुंदर गुलाबों की तस्वीरें खिची। वैसे मेरे खयाल से वेलंटाईन्‍स डे बकवास है। यह होलमार्क का बनाया हुआ त्‍यौहार है। सब लोग ईस दिन पर बहुत पैसे खर्च करते है, एक दूसरे को बताने के लिए कि वे कितना प्‍यार करते है। मुझे लगता है कि प्रेमी या पति वगैरह के साथ रोज़ लड़ना और फिर इस दिन ही प्‍यार दिखाना वह भी तोहफ़ों से, कोई बड़ी बात नहीं। अगर आप किसी से प्‍यार करते हैं तो हर दिन दिखना चाहिए, सिर्फ वेलंटाईन्‍स डे पर ही नहीं। वैसे फूल खरीदना, चोकलेटस खरीदना अच्‍छा लगता है, बुरा तो नहीं। मगर पैसे खर्च किये बिना भी हम लोगों को यानि माँ-बाप, भाई, बहन, प्रेमी, पति वगैरह को हर दिन, पूरी ज़िंदगी दिखा और कह सकते हैं कि हम उनसे कितना प्‍यार करते हैं। मेरे खयाल से यही सच्चा प्‍यार है, कोई होलमार्क का बनाया हुआ दिन नहीं।

1 Comments:

Anonymous vivek gupta said...

bilkul sahi baat hai...valentine day to vyaapaar ka madhyam hai...vaastav me pyaar karne ke liye koi 1 din nahi hota

2:37 am  

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