मंगलवार, फ़रवरी 15, 2005

भारत यात्रा

मैं अपने भारत यात्रा के बारे में बताना चाहती हूँ। इस गर्मीयों में मैं पहली बार भारत जाऊँगी। पहले हफ़ते मैं मुम्बाई में अपनी सहेली फ़ोईज़े और उसके परिवार के लोगों के साथ रहूँगी। फ़ोईज़े के साथ मैं मुम्बाई में घुमूँगी, लेकिन मैं भारत में यात्रा करना चाहती हूँ और फ़ोईज़े हमेशा बहुँत व्यस्त रही है इसलिए वह मेरे साथ यात्रा नहीं कर सकती। मुझे लगता है कि मेरे कुछ विकल्प हैं। शायद मुझे यात्रा साझी मिलना चाहिए, लेकिन कोन? अगर मैं यात्रा साझी नहीं मिलुँ तो शायद मैं वालनतीर प्रोग्राम कहुँ । शायद प्रोग्राम में मैं कुछ अच्छे लोगों से मिलुँ और प्रोग्राम के बाद हम साथ मैं यात्रा कर सकें। एक तीसरा विकल्प यह हैं कि मैं कुछ तुअर ग्रुप के साथ यात्रा करूँ। लेकिन मैं तुअर ग्रुप के साथ यात्रा कारना नहीं चाहती हूँ क्योकि तुअर्ज़ बजुँत महेंगा होता हैँ और शायद तुअर पर मैं भारतिये लोगों से नहीं मिलूँ , सिर्फ़ अमेरीकन और युरोपीयन लोगों से मिलूँ। जब कि भारत में मैं भरतिये लोगों को मिलना और हिन्दी बोलना चाहती हूँ

2 Comments:

Blogger Pratik said...

अगर आप कभी ताज नगरी आगरा आएं, तो मुझे ज़रूर याद कीजिएगा। और कुछ नहीं तो मैं आपको कम से कम आगरा की सैर तो करा ही सकता हूं।

1:00 am  
Blogger Dhananjaya Sharma said...

प्रिय जैसिका जी
नमस्कार ।

सर्वप्रथम, हिन्दी में चिठ्ठा "प्रारंभ" करने के बहुत-बहुत बधाई !

वास्तव में "प्रारंभ" ही सबकुछ है । एक बार जब कोई प्रक्रिया या विचार प्रारंभ हो जाता है तब वह चाहे उस विचार को प्रारंभ करने वाले द्वारा या अन्य किसी द्वारा अपने समापन पर अवश्य पहुँचता है, । उस समापन-बिन्दु पर, इस विचार को, इस प्रक्रिया को और अधिक वेहतर बनाने के लिए एक-और प्रारंभ प्रतीक्षा में रत होता है,। यही तो यात्रा है, शून्य से अनन्त और अनन्त से शून्य की ।

आप सभी "विष्कांसिन विश्वविद्यालय मेडिसन के छात्र है । अपने चिठ्ठे द्वारा, अपना, अपने साथियों व अपने विश्वविद्यालय का हम सभी से परिचय करायें ।

आपके भारत व हिन्दी के प्रति प्रेम के लिए भी साधुवाद । "अथिति देवो भव" अर्थात बिना किसी निश्चित तिथि पर बता कर आने वाला व्यक्ति, देवता-तुल्य होता है, ऐसा हम भारत-वासियों का मानना है । यदि आपका भारत के सुदूर पश्चिमी किनारे की ओर आने का विचार हो, तो आपका सहर्ष स्वागत है । आपका भारत-प्रवास आनन्दमय व सुखमय हो, ऐसी मै ईश्वर से कामना करता हूँ ।

धनञ्जय शर्मा
जामनगर, भारत ।

5:47 am  

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