सोमवार, फ़रवरी 28, 2005

दोस्‍ती

ज़िदगी में दोस्‍ती बहुत ज़रुरी होती है। दोस्‍त वे होते हैं जो हमारी ख़ुशियाँ बाँटते हैं और साथ में हमारे दुख के पल भी। जब हम किसी भी कारण दुखी हो जाते हैं तब हम दोस्‍त के पास जाकर दिल खोलकर बातें कर सकते हैं और मन हलका हो जाता है। वैसे जिंदगी में सैंकड़ों लोग हैं जो दोस्‍त बनने का नाटक करेंगे मगर बहुत कम लोग होते हैं जो सच्ची दोस्‍ती निभायेंगे। जब हम रोते हैं तो सच्चे दोस्‍त हमारे आँसू पोंछते हैं और जब हम खुश होते हैं तब वे भी हमारे लिये खुश होते हैं। जब हम हिम्‍मत हार जाते हैं तब वे हमारा हौंसला बढ़ाते हैं। हमें भी दोस्‍ती ऐसे ही निभानी चाहिए।

1 Comments:

Blogger kadianpow said...

मैं तुम से बिलकुल सहमत हूँ। मेरे खयाल में ज़िन्‍दगी में हम ऐसी दोस्‍ती बस
एक-दो लोगों से दोस्‍ती कर सकेंगे।

8:21 am  

एक टिप्पणी भेजें

<< Home