सोमवार, फ़रवरी 28, 2005

नियति की जर्नल

नियति की जर्नल 28/02/2005

आजकल मेरा जीवन मुझे बहुत परेशान करने हो रहा है। लोग कहते है कि जब एक खराब बात होती है, तब दूसरी खराब बात आएगी। और जब आप सोचते है कि जीवन और खराब नहीं हो सकता, तब हमेशाऔर खराब होतअ है। सब लोगों की ये आम धारणा हैं, लेकिन उसी समय सब लोग यह धारणा भूल जाने की कोशिश करते हैं। हम लोगों को आशा है कि हमारे लिये ये सच शब्द से दूर कर सकते है। काश, आजकल यह आम धारणा मेरा जीवन ठीक उस समय वर्णन करता है। हर बात गलत हो रही है, और जब भी मैं सोचती हूँ कि और खराब नहीं हो सकता , तब हमेशा और खराब होता है। मगर मुझे खूशी है कि एक दूसरी धारणा है, जो कहता है कि अगर बातें खराब हैं, तो उनको और अच्छा होना है। मेरे अगले जर्नल में और विस्तार से बातें खुलेंगी।