मंगलवार, अप्रैल 12, 2005

मेरा शौंक

आजकल मैं एक ही बड़ा शौंक है : कुम्हारगिरी । जब मैं न्यू योर्क में रहा तो मेरा दोस्त जिसके पिताजी कुम्हार हैं उसने मुझे कुम्हार के चाक पर गढ़ना सिखाया । तब से मुझे कुम्हार के चाक पर गढ़ना बहुत पसन्द है ।

इस शहर में कुम्हारों की बहुत अच्छी कार्यशाला है जो मेमोरियल यूनियन में है । मैं अपने सदस्यता खरीदकर उस कार्यशाला में काम कर सकता हूँ जब जब मैं चाहूँ । पहले से ही मैं ने आठ-नौ बरतन और दो फूलदान और पांच थालिया बनायी है । तीन दिनों में जब मैं अपने वर्ष-गांठ के लिए सिल्वी से (मेरी प्रेमिका) मिलने जाऊँगा तो मैं उसको ये पाँच थालिया दूँगा ।

मुझे कुम्हारगिरी बहुत अच्छा लगता है क्योंकि मैं दूसरे लोगों को उपहार दे सकता हूँ । कुम्हारगिरी बहुत आरामदेह भी है जैसा समाधि ।

अगर कोइ नया शौंक चाहता है तो शायद कुम्हारगिरी अच्छी हो । मुझे लगता है कि वह बहुत मज़ा, आरामदेह और दिलचस्प है ।

1 Comments:

Blogger आशीष said...

बड़ा ही अच्छा शौक है आपका। काश ऐसी प्रतिभाओं को भारत में उचित सम्मान मिले।

5:11 am  

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