सोमवार, फ़रवरी 28, 2005

नियति की जर्नल

नियति की जर्नल 28/02/2005

आजकल मेरा जीवन मुझे बहुत परेशान करने हो रहा है। लोग कहते है कि जब एक खराब बात होती है, तब दूसरी खराब बात आएगी। और जब आप सोचते है कि जीवन और खराब नहीं हो सकता, तब हमेशाऔर खराब होतअ है। सब लोगों की ये आम धारणा हैं, लेकिन उसी समय सब लोग यह धारणा भूल जाने की कोशिश करते हैं। हम लोगों को आशा है कि हमारे लिये ये सच शब्द से दूर कर सकते है। काश, आजकल यह आम धारणा मेरा जीवन ठीक उस समय वर्णन करता है। हर बात गलत हो रही है, और जब भी मैं सोचती हूँ कि और खराब नहीं हो सकता , तब हमेशा और खराब होता है। मगर मुझे खूशी है कि एक दूसरी धारणा है, जो कहता है कि अगर बातें खराब हैं, तो उनको और अच्छा होना है। मेरे अगले जर्नल में और विस्तार से बातें खुलेंगी।

दोस्‍ती

ज़िदगी में दोस्‍ती बहुत ज़रुरी होती है। दोस्‍त वे होते हैं जो हमारी ख़ुशियाँ बाँटते हैं और साथ में हमारे दुख के पल भी। जब हम किसी भी कारण दुखी हो जाते हैं तब हम दोस्‍त के पास जाकर दिल खोलकर बातें कर सकते हैं और मन हलका हो जाता है। वैसे जिंदगी में सैंकड़ों लोग हैं जो दोस्‍त बनने का नाटक करेंगे मगर बहुत कम लोग होते हैं जो सच्ची दोस्‍ती निभायेंगे। जब हम रोते हैं तो सच्चे दोस्‍त हमारे आँसू पोंछते हैं और जब हम खुश होते हैं तब वे भी हमारे लिये खुश होते हैं। जब हम हिम्‍मत हार जाते हैं तब वे हमारा हौंसला बढ़ाते हैं। हमें भी दोस्‍ती ऐसे ही निभानी चाहिए।

ए-ए-ए-एस संस्कृत प्रोग्राम

नमस्ते

मैं एक सवाल पूछना चाहता हूँ। इन गरमियों में शायद मैं भारत जाकर संस्कृत पढूँ। ए-ए-ए-एस कार्यक्रम पुणे में दस हफ़्ते के लिए होता है और मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा प्रोग्राम है। क्या किसी को इस पोग्राम के बारे में मालूम है ? क्या यह सफल प्रोग्राम है ? मैं तय करना की कोशिश कर रहा हुँ कि मैं जाऊँ या नहीं ।

आम तौर पर जब लोग (वेस्ट में) संस्कृत पढ़ते है तो वे संस्कृत किताबें पढ़ना ही सीख पाते हैं क्योंकि बहुत कम लोग संस्कृत बोल सकते हैं । लेकिन इस ए-ए-ए-एस प्रोग्राम में विद्यार्थी संस्कृत बोलना भी सीखते हैं। मुझे लगता है कि यह बहुत दिलचस्प है और शायद इससे मेरी संस्कृत सुधर जाए।

एक महीने पहले मैंने अपना प्रार्थना-पत्र दिया था और अब मैं उत्तर का इंतज़ार कर रहा हूँ।

हंस

गुरुवार, फ़रवरी 24, 2005

इतनी भूख, बाप रे बाप

आज सुबह चारपाई से उठकर मैं तुरन्त नाश्ता करना चाहता था। भूख के मारे मेरी आँते कुलकुला रही थीं। खाने का समय था नहीं क्योंकि अगर मैं नाश्ता करता तो हिन्दी क्लास देर से पहुँचता। जल्दी से कपड़े पहनकर, लपककर मैं घर से साईकल पर निकला। मुझे इतनी भूख लग रही थी। लेकिन मैं केला तक नहीं लाया था। जब देर से हिन्दी क्लास में पहुँचा, तब मैंने पाया कि पूरे दो घंटे मुझे भूख सहनी पड़ेगी। जब हम आपस में हिन्दी में बातचीत कर रहे थे उस दौरान मेरा पेट कुलकुला रहा था और तरह तरह के शोर मचा रहा था। उस वक्त स्काट जो मेरे सामने बैठा हुआ था मैं उससे कुछ बातें कर रहा था। उसने मेरी बात काटकर मुझे पूछा कि ये गुड़गुड़ाहट की आवाज़ कहाँ से आ रही है? मैंने उससे पूछा - कौनसी आवाज़? तभी फ़िर मेरा पेट और जोर से गुड़गुड़ाया। मुझे उस आवाज़ पर शर्म महसूस हुई और मैं सच कहता हूँ कि मैं उस आवाज़ को छिपाना चाहता था। उस समय मिकेला ने मुझे एक मिठाई दी । "अरे यह लो। मैंने तुम्हारे पेट की आवाज़ सुनी। अगर विजयजी कुछ कहेंगे तो मैं तुमको मिठाई देने का खून अपने सिर पर ले लूँगी, अच्छा?" मैंने सोचा कि इसमें हरज क्या है और आनन्द से मैंने मिठाई खाई।

बुधवार, फ़रवरी 16, 2005

विद्यार्थियों का जीवन

विद्यार्थियों का जीवन मुश्किल है। जब मैंने ग्रैजुएट के स्कूल जाने पर निश्चय किया तब मुझे मालूम था कि बहुत कठिनाइयाँ होती। आवेदन-पत्र भरने के दौरान मैंने अपनी पत्नी को विस्तार से यह बातें समझाने की कोशिश की मानो मुझे ख़ुद यह बातें समझी। कितना दूध पीना बच्चा मैं था! उस समय हमको मालूम नहीं था कि कभी कभी जैसा अग्नि-परीक्षा हमारी ज़िन्दगी लगती होती।

पहले मैंने आवेदन-पत्र भेजकर जवाब का इन्तज़ार किया। लम्बे समय तक मैं जवाब का इन्तज़ार कर रहा था और रात-दिन मेरी चित्त अशांत हो जाता था। मुझे संदेह हो रहा था कि मुझे तो वे नहीं मागते होते। जब तक मैं रोना चाहता था तब तक जवाब आया। ज़मीन पर पाँव नहीं रखा था! लेकिन उस के बाद भी मुझे समझा कि मेरी परेशानियों की चरम सीमा नहीं था। पेपरज़, परीक्षाएं, ग्रेडज़, और मैस्टर का थीसिस - अरे बाब रे इनतना काम है! लेकिन मैं अभी तक यहाँ हूँ। क्या मैं तो पागल हूँ?

मंगलवार, फ़रवरी 15, 2005

भारत यात्रा

मैं अपने भारत यात्रा के बारे में बताना चाहती हूँ। इस गर्मीयों में मैं पहली बार भारत जाऊँगी। पहले हफ़ते मैं मुम्बाई में अपनी सहेली फ़ोईज़े और उसके परिवार के लोगों के साथ रहूँगी। फ़ोईज़े के साथ मैं मुम्बाई में घुमूँगी, लेकिन मैं भारत में यात्रा करना चाहती हूँ और फ़ोईज़े हमेशा बहुँत व्यस्त रही है इसलिए वह मेरे साथ यात्रा नहीं कर सकती। मुझे लगता है कि मेरे कुछ विकल्प हैं। शायद मुझे यात्रा साझी मिलना चाहिए, लेकिन कोन? अगर मैं यात्रा साझी नहीं मिलुँ तो शायद मैं वालनतीर प्रोग्राम कहुँ । शायद प्रोग्राम में मैं कुछ अच्छे लोगों से मिलुँ और प्रोग्राम के बाद हम साथ मैं यात्रा कर सकें। एक तीसरा विकल्प यह हैं कि मैं कुछ तुअर ग्रुप के साथ यात्रा करूँ। लेकिन मैं तुअर ग्रुप के साथ यात्रा कारना नहीं चाहती हूँ क्योकि तुअर्ज़ बजुँत महेंगा होता हैँ और शायद तुअर पर मैं भारतिये लोगों से नहीं मिलूँ , सिर्फ़ अमेरीकन और युरोपीयन लोगों से मिलूँ। जब कि भारत में मैं भरतिये लोगों को मिलना और हिन्दी बोलना चाहती हूँ

एक सवाल है।

मेरा कमप्यूटर हिन्दी में लिख नहीं सकता है। क्यों नहीं? जब मैं शब्द लिखती हूँ, तब अक्षर-लेखन के बीच में हमेशा स्थान है। बहुत बहुत घिनौना है। आप लोग कोई विचार हैं?

मध्य-पूर्व में शांति

सबलोगों को नमस्ते!

पिछले हफ़ते मैंने मध्य-पूर्व में शांति के बारे में लिखा। आपकी राय क्या है मुझे जरूर बतायें।

मधयपूर्व में आठ फ़रवरी बहुत महत्त्वपूर्ण दिन था। इज़रायल के नेता और फिलिस्तीन के नेता एक दूसरे से मिले और उन्होंने शांति के बारे में बात की। इज़रायल से एरिएल शरोन और फिलिस्तीन से मुहम्मद अब्बास सहमत हो गए कि दोनों पक्ष हिंसा पूरी तरह रोकेंगे।
मुझे लगता है कि यह बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अब्बास नये नेता हैं। पिछले नवम्बर में यासिर अराफ़ात जो फ़िलिस्तीन के नेता थे वे मर गये। उस के बाद जनवरी में अब्बास चुनाव में जीतकर नये नेता हो बने। उन्होंने दूसरे नेता से जल्दी से बात करना शुरू किया जिस से शायद शांति हो। वे अच्छा काम कर रहे हैं और मुझे आशा है कि मधयपूर्व की स्थिति सुधरेगी।

आप क्या सोचते हैं ?

वेलेंटाइन्स डे

आज मैं वेलंटाईन्‍स डे के बारे में लिखूँगी। कल दस बजे एक आदमी मेरा दरवाज़ा खटखटा रहा था। तो मैं दरवाजा खोलने गयी। जब मैंने दरवाजा खोला तब मैंने एक बड़ा गुलदस्‍ता डाकिये (पोस्‍टमैन) के हाथों में देखा। बारह लाल गुलाब उस गुलदस्‍ते में थे। बहुत ही ख़ूबसूरत गुलाब थे। मैं ने उन सुंदर गुलाबों की तस्वीरें खिची। वैसे मेरे खयाल से वेलंटाईन्‍स डे बकवास है। यह होलमार्क का बनाया हुआ त्‍यौहार है। सब लोग ईस दिन पर बहुत पैसे खर्च करते है, एक दूसरे को बताने के लिए कि वे कितना प्‍यार करते है। मुझे लगता है कि प्रेमी या पति वगैरह के साथ रोज़ लड़ना और फिर इस दिन ही प्‍यार दिखाना वह भी तोहफ़ों से, कोई बड़ी बात नहीं। अगर आप किसी से प्‍यार करते हैं तो हर दिन दिखना चाहिए, सिर्फ वेलंटाईन्‍स डे पर ही नहीं। वैसे फूल खरीदना, चोकलेटस खरीदना अच्‍छा लगता है, बुरा तो नहीं। मगर पैसे खर्च किये बिना भी हम लोगों को यानि माँ-बाप, भाई, बहन, प्रेमी, पति वगैरह को हर दिन, पूरी ज़िंदगी दिखा और कह सकते हैं कि हम उनसे कितना प्‍यार करते हैं। मेरे खयाल से यही सच्चा प्‍यार है, कोई होलमार्क का बनाया हुआ दिन नहीं।

सोमवार, फ़रवरी 14, 2005

इतनी दूर नहीं है!

इस सेमेस्‍टर की शुरुआत से मैं सोचती रहती हूँ कि मुझे कुछ होटल के कमरे आरक्षित करवाकर रखने चाहिए। मगर अब तक मैं भूलती रही. फिल्‍म देखते हुए मुझे मालूम हुआ कि मुझे फ़ोन बुक लेकर होटल मैडिसन में फ़ोन करना चाहिए. जो भी होटल कोल सेंटर के पास हैं वे या तो बहुत महँगे हैं या उनमें कमरे नहीं मिलते. मुझे अपने पारिवारवालों और दोस्‍तों के लिए कम से कम चार-पाँच कमरे चाहिएँ, तो इसलिए कमरे थोड़े सस्‍ते होने चाहिए. हलाँकि मैं तो होटल का बिल अदा नहीं करूँगी तो भी मैं चाहती हूँ कि सब लोग किराये की शिकायत न करें. बाकी होटल कोल सेंटर से थोड़ा सा दूर है. कोल सेंटर या मेरे अपार्टमेंट से आने में उनको बीस-पच्‍चीस मिनट लगेंगे. लेकिन मुझे लगता है कि यही ठीक रहेगा क्‍योंकि ऊन दो दिनों में दो-तीन बार गाड़ी चलानी पड़ेगी. मेरी वजह से मेरा परिवारवाले और दोस्‍तों को थोड़ी असुविधा बर्दाश्त करनी पड़ेगी. मगर यही ठीक रहेगा क्‍योंकि वे मुझ से बहुत प्‍यार करते हैं!