मंगलवार, अप्रैल 19, 2005

बड़ा चुहा!!

आज मेने दफ़तर में एक चुहे को देखा। वह बहुत बड़ा था। अभी मैं दफ़तर में हूँ और यह डरकर लिख रही हूँ
क्‍योंकि चूहा यहीं कहीं होगा। पता नहीं वह कहाँसे आया। बहरहालम मैं अपना धयान किसी और चीज़ पर
रखती हूँ। तो कल में और मेरी सहेली पार्टी में जायेंगे। किसी का जन्‍म दिन हैं। अभी तक यह चुहामेरे खयाल
में है। लगता है मुझे घर जाना पड़ेगा मैं यहाँ काम नहीं कर सकती जबतक यह चुहा न मरे। यहीं कहीं होगा और
छुपके से मुझे देख रहा होगा। मुझे तो अब घर भाग ना पड़ेगा!!।

Hindi Film Lakshay

मैंने लक्षय फिल्‍म पिछले हफते देखी। रितिक रोशन की फिल्‍म थी। आमतौर से मुझे रितिक की फिल्‍में पसन्‍द
है लेकिन यह फिल्‍म मुझे बिलकुल पसंद न आयी।यह फिल्‍म पाकिसतान और भारत के बीच जो लड़ायी चलती
रहती है उसके बारेमें है। मगर इस फ़िल्‍म में मुसलमान लोगों को बुरा दिखाते हैं। और भारत केलोगों को अच्‍छा
दिखाते हैं। ऐसी फ़िल्‍में अच्‍छी नहीं है क्‍योंकि ऐसी फ़िल्‍में औरनफ़रत फैलाती हैं और लोगों के दिल में नफ़रत
जगाती हैं। इस लिए पिंजर फ़िल्‍ममुझे पसंद आयी क्‍योंकि उस फ़िल्‍म में न पाकिस्‍तान या भारत को अच्‍छा
दिखातेहैं सिर्फ सत्‍य और प्‍यार दिखायी देता है। उस फ़िल्‍म ने दिखया कि स्‍वार्थ के कारणकितने लोग मर जाते है।
मुसलमान और हिंदु दोनो।

सोमवार, अप्रैल 18, 2005

हिन्दी फ़िल्म-नाईट

शुक्रवार रात को मेरे यहाँ हिन्दी फ़िल्मी नाइट हुआ था। बहुत हिन्दी भाषा के विद्यार्थियाँ और हमारे शिक्षक विजय हिन्दी फ़िल्म देखने के लिए आए। विजय जी ने और मेरी पत्नी विदुला ने रसोईघर में पकोड़े और बटाटे वाडे बनाए। हमारे दो महाराज ने बहुत लज़ाज़ और स्वदिष्ट खाना बनाया। बाकी लोग ने सिर्फ़ बीर और आलू चिप्स लाए, हंस सिवय जिसने खीर बनाकर लाया। जो फ़िल्म हमने देखी उसका नाम ‘Black’ था। फ़िल्म शुरू कर जाने के पहले हंस और मैँ मौलिक पंजाबी भंग्रा नाच नाचे। नाच सफल था क्योंकि मैं गिरे बिना नाच सका। फ़िल्मी नाइट बड़ी सफलता थी, इसलिए कि इतना मज़ा नहीं आया।

ज्योंही कार्यक्रम ख़त्म हुआ त्योंही सब लोग अपने लिविंग रूम साफ़ करके एक एक घर से निकले। मैं और विदुला अकेले फ़िर थे। हम दोनों ने घर साफ़ कर गया और थोड़े समय के बाद हम सो गए। मेरे ख़्याल में हम लोगों को थोड़े देर से दुसरा हिन्दी फ़िल्मी नाइट का इंतज़ाम करना चाहिए। सेमेस्टर का अंत जल्दी से आ रहा है और इस सेमेस्टर ख़त्म होकर बैठा ही होगा कि विदुला और मैं मैडिसन से मिनियैपोलिस तक शिफ़्ट करेंगे। कम-से-कम और एक ऐसा फ़िल्मी नाइट होना चाहिए क्योंकि मेरे मैडिसन के दिन बहुत दिनों तक नहीं रहेंगे।

(POSTED BY MIKE COGGINS)

शुक्रवार, अप्रैल 15, 2005

At the Dentist

जीवन मे, दो चीज़ें जो अक्‍सर मुझो बिलकुल पसन्‍द नहीं: जल्‍दी उठना औरडेन्‍टिस्‍ट के यहाँ जाना। मुझे एक और बात कहना चाहिए थी। मुझे जल्‍दी डेन्‍टिस्‍ट के यहाँ जाना बूरा लगता है। आम तौर से मुझ से छ: बजे नहीं उठा जाता है। मगरपिछले गरमियों में मुझे अपना डेन्‍टिस्‍ट के यहाँ अपोइंटमेंट के लिए जल्‍दी उठनापड़ा। आसानी बात नहीं था! की बार फिर से सो गाई लेकिन जब पंद्रह ही मिनटबाकी थे , मैं जगी थी। जब मैं डेन्‍टिस्‍ट के यहाँ पहुँची, उनहोंने मुझे बताया किमेरे मुहँ मे कुल मिलाकर आठ कैविटीस थे लेकिन सिर्फ चार बायी तरफ़ दाँत भरे जाएगे। उपरवाले दातँ चांदी की फ़िलिंग से भरे गये थे। और नीचेवाले दातँ सफेद फ़िलिंग से भरे गये थे। वहाँ से वापस आने के बाद मेरा मुहँ चार घंटों तकसूजि रहा। और एक ही हफंते के बाद मुझे अपने दुसरे चार दातँ ठीक करवाने वापस जाना पाड़ा।

बुधवार, अप्रैल 13, 2005

नियति की जर्नल #3

नियति की जर्नल #3 05/04/2005

मुझे मालूम नहीं है। हर दिन मेरा जीवन और जटिल हो रहा है। मौसम बहुत अच्छा है, लेकिन मुझे खुशी नहीं है। मुझे लगता है कि जब मौसम गरम और धूप-भरा है, तब सब लोगों को खुश हों। पिछला हफ़ते मैं किसी से मिली, और वह बहुत अच्छा और रूपवान आदमी है। मगर उसी समय इस हफ़ते के दौरान मेरा एक्स-प्रेमी मेरे घर पर आने रहता है। यह बहुत मुशकिल मेरे लिये क्योंकि मैं उस से कहना चाहिती हूँ। अंत में कल मैं ने द्वार खोला और हम चार ंघट के लिये बताये। साफ़-साफ़ रात भर वह मुझे माफ़ करने रहते है, और वह मुझे उसके बहाने दिये। अब मुझे मालूम नहीं।

मंगलवार, अप्रैल 12, 2005

मेरा शौंक

आजकल मैं एक ही बड़ा शौंक है : कुम्हारगिरी । जब मैं न्यू योर्क में रहा तो मेरा दोस्त जिसके पिताजी कुम्हार हैं उसने मुझे कुम्हार के चाक पर गढ़ना सिखाया । तब से मुझे कुम्हार के चाक पर गढ़ना बहुत पसन्द है ।

इस शहर में कुम्हारों की बहुत अच्छी कार्यशाला है जो मेमोरियल यूनियन में है । मैं अपने सदस्यता खरीदकर उस कार्यशाला में काम कर सकता हूँ जब जब मैं चाहूँ । पहले से ही मैं ने आठ-नौ बरतन और दो फूलदान और पांच थालिया बनायी है । तीन दिनों में जब मैं अपने वर्ष-गांठ के लिए सिल्वी से (मेरी प्रेमिका) मिलने जाऊँगा तो मैं उसको ये पाँच थालिया दूँगा ।

मुझे कुम्हारगिरी बहुत अच्छा लगता है क्योंकि मैं दूसरे लोगों को उपहार दे सकता हूँ । कुम्हारगिरी बहुत आरामदेह भी है जैसा समाधि ।

अगर कोइ नया शौंक चाहता है तो शायद कुम्हारगिरी अच्छी हो । मुझे लगता है कि वह बहुत मज़ा, आरामदेह और दिलचस्प है ।

इंडिया-नाइट की तस्वीरें

पायल रामजी


पायल और मेघा


केडियन और स्काट (दाहिने से पहले और दूसरे)